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Friday, 17 April 2015

जानवर जानवर होता है-बेनाम कोहड़ाबाज़ारी

जानवर जानवर होता है 

दूसरों का दिया हुआ नाम नहीं होता 
झूठा कोई अभिमान नहीं होता
चूकि जानवर इंसान नहीं होता 
इसीलिए जानवर जानवर होता है.

नोचता है , खोचता है 
दूर से झपटता है
भूख लगती है 
तो जान भी लेता है
चुकि जान को लेता है 
इसीलिए जानवर जानवर होता है.

जब प्यार करता है तो प्यार करता है जानवर
दुलार करता है तो दुलार करता है जानवर 
झूठा कोई ईमान नहीं होता 
जानवर सच में बेईमान नहीं होता
चुकि जानवर कभी बेईमान नहीं होता
इसीलिए जानवर जानवर होता है.

ठोकता सलाम है हाथों को जोड़
दुश्मनों के हौसले को देता है तोड़ 
मालिक के खातिर जान को देता है 
मालिक के जान को भगवान सा समझता है 
चुकि जरूरत पड़ने पे जान को देता है 
इसीलिए जानवर जानवर होता है.

झूठी बात ना समझता है जानवर 
औरों की निंदा कर ना हँसता है जानवर
पूंछ डुलाके दिखता है प्यार
गुस्सा आये तो करता है वार
गाली देने को जुबाँ नहीं होती 
किसी को नाहक नहीं बुरा भला कहती 
क्योकि जानवर बेजुबान होता है 
इसीलिए जानवर जानवर होता है.

जानवर कभी शैतान नहीं होता
जानवर का कोई भगवान नहीं होता 
जानवर का कोई ना होता है वेश 
आगे जाने की कोई नहीं रेस
जाति नहीं होती , धर्म नहीं होता , 
जानवर का कोई देश नहीं होता
चुकि जानवर का देश नहीं होता
इसीलिए जानवर जानवर होता है.

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