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Sunday, 3 May 2015

अग्निपथ-हरिवंशराय बच्चन

वृक्ष हो भले खड़े, हो घने हो बड़े, एक पत छांव की
मांग मत, मांग मत, मांग मत
अग्निपथ, अग्निपथ, अग्निपथ |

तू न थकेगा कभी, तू न थमेगा कभी, तू न मुड़ेगा कभी
कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ
अग्निपथ, अग्निपथ, अग्निपथ |

ये महान दृश्य है, चल रहा मनुष्य है, अश्रु स्वेद रक्त से
लथपथ, लथपथ, लथपथ
अग्निपथ, अग्निपथ, अग्निपथ|

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