वृक्ष हो भले खड़े, हो घने हो बड़े, एक पत छांव की
मांग मत, मांग मत, मांग मत
अग्निपथ, अग्निपथ, अग्निपथ |
तू न थकेगा कभी, तू न थमेगा कभी, तू न मुड़ेगा कभी
कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ
अग्निपथ, अग्निपथ, अग्निपथ |
ये महान दृश्य है, चल रहा मनुष्य है, अश्रु स्वेद रक्त से
लथपथ, लथपथ, लथपथ
अग्निपथ, अग्निपथ, अग्निपथ|
No comments:
Post a Comment