मैं इस ब्लॉग का इस्तेमाल अपनी पसंदीदा कविताओं,कहानियों, को दुनिया के सामने लाने के लिए कर रहा हूँ. मैं इस ब्लॉग का इस्तेमाल अव्यावसायिक रूप से कर रहा हूँ.मैं कोशिश करता हूँ कि केवल उन्ही रचनाओं को सामने लाऊँ जो पब्लिक डोमेन में फ्री ऑफ़ कॉस्ट अवेलेबल है . यदि किसी का कॉपीराइट इशू है तो मेरे ईमेल ajayamitabhsuman@gmail.comपर बताए . मैं उन रचनाओं को हटा दूंगा. मेरा उद्देश्य अच्छी कविताओं,कहानियों, को एक जगह लाकर दुनिया के सामने प्रस्तुत करना है.


Sunday, 10 May 2015

पत्थर और मोम-बेनाम कोहड़ाबाज़ारी

स्त्री होती है मोम
बाहर से
और
भीतर से पत्थर
जबकि
पुरुष होते है मोम
भीतर से
और
बाहर से पत्थर
क्योकि
एक विधवा ढो सकती है
भार
एक परिवार का बखूबी
अकेले
पर
बहुत मुश्किल होता है
जीना
एक विधुर का
अकेले

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