रह - रह कूक रही मतवाली
कोयल कुंज-भवन में है,
श्रवण लगा सुन रही दिशाएँ,
स्थिर शशि मध्य गगन में है।
किसी महा - सुख में तन्मय
मंजरी आम्र की झुकी हुई,
अभी पूछ मत प्रिये, छिपी-सी
मृत्यु कहाँ जीवन में है।
कोयल कुंज-भवन में है,
श्रवण लगा सुन रही दिशाएँ,
स्थिर शशि मध्य गगन में है।
किसी महा - सुख में तन्मय
मंजरी आम्र की झुकी हुई,
अभी पूछ मत प्रिये, छिपी-सी
मृत्यु कहाँ जीवन में है।
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