तुम्हें मरण का सोच निरन्तर
तो पीयूष पिया किसने?
तुम असीम से चकित, इसे
सीमा में बाँध लिया किसने?
सब आये हँस, बोल, सोच,
कह, सुन मिट्टी में लीन हुए;
इस अनन्य विस्मय का सुन्दरि!
उत्तर कहो दिया किसने?
तो पीयूष पिया किसने?
तुम असीम से चकित, इसे
सीमा में बाँध लिया किसने?
सब आये हँस, बोल, सोच,
कह, सुन मिट्टी में लीन हुए;
इस अनन्य विस्मय का सुन्दरि!
उत्तर कहो दिया किसने?
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